बुध ग्रह के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह
बुध शांत और सौम्य स्वभाव के, सुवक्ता और हरे वर्ण वाला ग्रह हैं। बुध देव चंद्रमा के पुत्र हैं, बुध देव की माता का नाम तारा है। ज्योतिष शास्त्र में बुद्ध को एक शुभ ग्रह माना जाता है। बुध मिथुन एवं कन्या राशियों का स्वामी है तथा कन्या राशि में बुध उच्च का होता है, तथा मीन राशि में नीच का होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह स्त्री लिंग का रजोगुणी तथा वायु तत्व प्रधान ग्रह है। बुध ग्रह का ज्योतिष में अपना ही आयाम है। ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, तर्क और उत्तम व्यापार का कारक माना जाता है। बुध ग्रह 12 भावों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह से प्रभाव देता है।
बुध ग्रह के सकारात्मक प्रभाव
बुध के सकारात्मक प्रभाव से जातक की जातक की संवाद शैली कुशल होती है। और वह बुद्धिमान तथा हाज़िर जवाब होता है। जातक अपनी बातों व तर्कों से सबको मोह लेता है। जातक अपनी हाज़िर जवाबी से समाज में अपना प्रभाव छोड़ता है। पढ़ाई-लिखाई के मामले में भी जातक अच्छा होता है। अपनी बुद्धि के बल पर जातक व्यापार में उन्नति करता है और कम मेहनत करके भी अधिक कमाई करता है। यदि जातक नौकरी करता है तो नौकरी में भी कोई परेशानी नहीं होती जातक समय-समय पर उन्नति करता है जातक की बहन, बुआ और बेटी का जीवन सुखमय रहता है और आपसी प्रेम बना रहता है। बुध के सकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति की तार्किक क्षमता तीव्र होती है ।
बुध ग्रह के नकारात्मक प्रभाव
बुध के नकारात्मक प्रभाव से जातक को बोलने में परेशानी का सामना करना पडता है तथा आपके मित्रों से संबंध बिगड़ जाते, सूंघने की शक्ति कमजोर हो जाती। समय पूर्व ही दांत खराब हो जाते । लेखन कौशल अच्छा नहीं होता, जातक की तार्किक क्षमता बहुत कमजोर होती है। इसके साथ ही बहन, बुआ, बेटी और मौसी किसी ना किसी कारण परेशान रहती है, यदि जातक इनसे संबंध खराब कर लेता है, तो बुध ग्रह और भी ज्यादा विपरीत (बुरा प्रभाव) प्रभाव देने लगेगा। पीड़ित बुध के प्रभाव से व्यक्ति को क़ारोबार में हानि होती है, व्यापारियों का दिया या लिया धन अटकने लगता है और जीवन में दरिद्रता आने लगती है।
बुध ग्रह की शांति के टोटके/उपाय
(1) चांदी धारण करें
(2) छोटी कन्याओं, दुर्गा माता व भगवान विष्णु की पूजा करें ।
(3) बहन बुआ बेटी की सेवा करें और उनको कभी भी अपशब्द ना बोलें और इन्हें घर से कुछ न कुछ देकर ही विदा करें।
(4) हरे रंग से यथासंभव दूर रहें। हर रोज फिटकिरी से अपने दाँत साफ करें। घर में गाने बजाने का सामान न रखें, जैसे ढोलक आदि।
(5) पक्षियों की सेवा करें और एक बकरी दान करें , गाय को हरा चारा खिलाएं. पालक भी खिला सकते हैं।
(6) साबुत मूंग अपने ऊपर से सात बार उतार कर बहते जल मे प्रवाहित करें अथवा मंदिर में दान दें ।
(7) मांस और अंडे से दूरी बनाए रखें तथा आपको मां दुर्गा की भक्ति करना चाहिए।
(8) घर की छत को हमेशा साफ रखें घर की छत पर किसी भी प्रकार का कचरा नहीं होना चाहिए।
(9) घर में रबर प्लांट, मनी प्लांट व चौड़े पत्ते वाले पेड़-पौधे न लगाएं।
(10) घर में बकरी, तोता, कबूतर या अन्य किसी प्रकार का पक्षी ना पाले।
बुध की वस्तुओं का दान
बुध का दान वाली वस्तुओं में हरा वस्त्र, बकरी, पन्ना, चांदी, कस्तूरी, कद्दू आदि वस्तुओं है। यह दान प्रत्येक बुधवार के दिन किया जा सकता है।
नोट-: किसी
भी ग्रह का दान करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण करा लेने के बाद ही दान
करना चाहिए क्योंकि कुंडली में बैठे ग्रहों के आधार पर ही जान सकते हैं की किस ग्रह का दान करना चाहिए और किस ग्रह का दान नहीं करना चाहिए।
बुध के मंत्र व रत्न
बुध का रत्न -: पन्ना (Emerald)
बुध गायत्री मंत्र -: ॐ चन्द्रपुत्राय विदमहे रोहिणी प्रियाय धीमहि तन्नोबुध: प्रचोदयात।
बुध मंत्र जाप संख्या -: 9 हजार मंत्र जाप
बुध का तांत्रोक्त मंत्र -: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः।
बुध का वैदिक मंत्र -: ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रतिजागृहि त्वमिष्टापूर्ते स सृजेथामयं च।
अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन्विश्वे देवा यजमानश्च सीदत॥
बुध का पौराणिक मंत्र -: प्रियंगुकलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम॥
बुध की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए तथा नकारात्मक उर्जा को कम करने के लिए उपरोक्त उपाय के साथ-साथ बुध स्तोत्र बुध ग्रह कवच ,पढ़ सकते हैं, साथ ही बुध देव की आरती भी कर सकते हैं।
॥ बुध ग्रह कवच ॥
II श्री गणेशाय नमः II
अस्य श्रीबुधकवचस्तोत्रमंत्रस्य
कश्यप ऋषिः I
अनुष्टुप् छंदःI बुधो देवता I बुधपीडाशमनार्थं जपे विनियोगः ॥
बुधस्तु पुस्तकधरः कुंकुमस्य समद्दुतिः I पितांबरधरः पातु पितमाल्यानुलेपनः ॥ 1 ॥
कटिं च पातु मे सौम्यः शिरोदेशं बुधस्तथा I नेत्रे ज्ञानमयः पातु श्रोत्रे पातु निशाप्रियः ॥ 2 ॥
घ्राणं गंधप्रियः पातु जिह्वां विद्याप्रदो मम I कंठं पातु विधोः पुत्रो भुजा पुस्तकभूषणः ॥ 3 ॥
वक्षः पातु वरांगश्च हृदयं रोहिणीसुतः I नाभिं पातु सुराराध्यो मध्यं पातु खगेश्वरः II 4 II
जानुनी रौहिणेयश्च पातु जंघेSखिलप्रदः I पादौ मे बोधनः पातु पातु सौम्योSखिलं वपु ॥ 5 ॥
एतद्धि कवचं दिव्यं सर्वपापप्रणाशनम् I सर्व रोगप्रशमनं सर्व दुःखनिवारणम् ॥ 6 ॥
आयुरारोग्यधनदं पुत्रपौत्रप्रवर्धनम् I यः पठेत् श्रुणुयाद्वापि सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ 7 ॥
II इति श्रीब्रह्मवैवर्तपुराणे बुधकवचं संपूर्णं II
॥ बुध स्तोत्र ॥
पीताम्बर: पीतवपुः किरीटश्र्वतुर्भजो देवदु: खपहर्ता।
धर्मस्य धृक् सोमसुत: सदा मे सिंहाधिरुढो वरदो बुधश्र्व ॥1॥
प्रियंगुकनकश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्य गुणोपेतं नमामि शशिनंदनम ॥ 2॥
सोमसूनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित:।
सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम् ॥ 3॥
उत्पातरूप: जगतां चन्द्रपुत्रो महाधुति:।
सूर्यप्रियकारी विद्वान् पीडां हरतु मे बुध: ॥4॥
शिरीष पुष्पसडंकाश: कपिशीलो युवा पुन:।
सोमपुत्रो बुधश्र्वैव सदा शान्ति प्रयच्छतु ॥5॥
श्याम: शिरालश्र्व कलाविधिज्ञ: कौतूहली कोमलवाग्विलासी । रजोधिकोमध्यमरूपधृक्स्यादाताम्रनेत्रीद्विजराजपुत्र: ॥6॥
अहो चन्द्र्सुत श्रीमन् मागधर्मासमुद्रव:।
अत्रिगोत्रश्र्वतुर्बाहु: खड्गखेटक धारक: ॥7॥
गदाधरो न्रसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित:।
केतकीद्रुमपत्राभ इंद्रविष्णुपूजित: ॥8॥
ज्ञेयो बुध: पण्डितश्र्व रोहिणेयश्र्व सोमज:।
कुमारो राजपुत्रश्र्व शैशेव: शशिनन्दन: ॥9॥
गुरुपुत्रश्र्व तारेयो विबुधो बोधनस्तथा।
सौम्य: सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रद: ॥10॥
एतानि बुध नमामि प्रात: काले पठेन्नर:।
बुद्धिर्विव्रद्वितांयाति बुधपीड़ा न जायते ॥11॥
॥ इति मंत्रमहार्णवे बुधस्तोत्रम ॥
॥ बुध देवता की आरती ॥
आरती युगलकिशोर की कीजै। तन मन धन न्यौछावर कीजै॥
गौरश्याम मुख निरखन लीजै। हरि का रूप नयन भर पीजै॥
रवि शशि कोटि बदन की शोभा। ताहि निरखि मेरो मन लोभा॥
ओढ़े नील पीत पट सारी। कुजबिहारी गिरिवरधारी॥
फूलन सेज फूल की माला। रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला॥
कंचन थार कपूर की बाती। हरि आए निर्मल भई छाती॥
श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी। आरती करें सकल नर नारी॥
नन्दनन्दन बृजभान किशोरी। परमानन्द स्वामी अविचल जोरी॥
आरती युगलकिशोर की कीजै। तन मन धन न्यौछावर कीजै॥